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तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ

तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ हो गिला तुझसे ही तो किससे ख़ुदा शिकवा करूँ हर सुतूं मिस्मार है अब इस हिसारे जिस्म का रूह जाने को ही राज़ी है नहीं तो क्या करूँ धूप के मासू...

कोई शिकवा गिला है ही नहीं अब

कोई शिकवा गिला है ही नहीं अब अदावत  में  मज़ा  है  ही नहीं अब चलो  फिर  इब्तिदा  पर  लौटते  हैं उमीदे   इंतिहा   है   ही  नहीं  अब ख़ुशी की जुस्तजू की क्या ज़रूरत ग़मों  से  वास्...

अगर क़ुव्वत है तो पढ़ लो हमारी मुस्कराहट को

अगर  क़ुव्वत है तो  पढ़ लो  हमारी  मुस्कराहट को झुकी पलकें बताओ सुन रही हैं किसकी आहट को भले   मासूम   चेहरे  पर   निगाहें   थम   गयीं  मेरी मगर  पढ़  तो चुका  हूँ तेरे मन की  छ...

शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी

शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी उदासी  रात  भर  बेकल  रही  थी सुकूं  गायब  हुआ  चेहरे  से  उसके जो  देखा  नब्ज़  मेरी  चल रही थी गले  मिलकर गला काटा फिर उसने वही  फ़ित्रत  दिखी जो क...

नींद के बोझ से कुछ सँभलता हुआ

नींद   के  बोझ  से  कुछ  सँभलता हुआ शम्स निकला है फिर आँख मलता हुआ ये  पता  अब  चला ,संगे मील इस क़दर दूर   लाया   हमे ,  साथ   चलता   हुआ ख़्वाब  मेरे  थे  शादाब   गुल  की  तरह क्...

न है अब शै कोई जो चैन छीने

न है अब शै कोई जो चैन छीने यूँ मुत'अस्सिर किया है शायरी ने समंदर से निकलने को है दरिया किया आगाह आँखों की नमी ने नही छूटे हैं उसके दाग अब तक बहुत दिन चाँद को धोया नदी ने चला हूँ ध...

मेरा ख़ुशियों से साबका पूछा

मेरा  ख़ुशियों से साबका पूछा रात  से  धूप  का  पता  पूछा अश्क़    तीमारदार   थे    मेरे दर्द  ने  हाल  ज़ख़्म  का  पूछा ज़िन्दगी की न फ़िक्र की, उसने शुक्र  है,  बाइसे   क़ज़ा,  पूछा ...