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Showing posts from November, 2017

दिल तू केवल अपने काम से काम रखा कर

दिल तू केवल अपने काम से काम रखा कर प्यार  मुहब्बत  के  लफड़ों  से  दूर  रहा कर दुनिया  ख़ुद  तो  जाना  चाहेगी मंज़िल तक तुझको   भटका  देगी  दूजी  राह  दिखाकर अपनी   अपनी   कश्...

जिसे छू के मैं बारहा जल चुका हूँ

जिसे छू के मैं बारहा जल चुका हूँ उसी  राख  में  ज़िंदगी  ढूंढता  हूँ लहू जिनकी आँखों में उतरा है, उनसे है  पानी  कहाँ  आँख  का, पूछता हूँ लिए  आग  आँखों  में, आँसू  गले  में ख़ुद ...

अब सबा भी बादे सर सर बन गयी है

अब सबा भी बादे सर सर बन गयी है मैं बिखर जाऊँ, सही मौसम यही है जब सराबों से घिरा है सारा सहरा फिर वहाँ क्यूँ तिश्नगी ही तिश्नगी है अब हुई महसूस उन्हें मेरी ज़रूरत बर्फ अना की धीर...

सज़ा के तौर पर दुनिया बसाना

सज़ा के तौर पर दुनिया बसाना गुनह कितना हसीं था सेब खाना रहा अव्वल तेरे हर इम्तिहां में ख़ुदा अब बंद कर दे आज़माना चढ़े सूरज का मुस्तकबिल यही है किसी छिछली नदी में डूब जाना  ...

ज़िक्र मैं कैसे करूँ तेरी जफ़ा का

ज़िक्र मैं कैसे करूँ तेरी जफ़ा का दे चुका हूँ जब तुझे दर्जा ख़ुदा का ज़िन्दगी जीना बहुत मुश्किल नहीं है क्यूँ करूँ मैं इंतज़ार अपनी क़ज़ा का रब तुझे तो ढूँढ़ कर मैं थक गया हूँ दे दिय...

अगर आँसुओं का सहारा न होता

अगर आँसुओं का सहारा न होता ग़मों का जहां में गुजारा न होता अगर हुस्न से इश्क हारा न होता तो यूँ हुस्न को इश्क़ प्यारा न होता मेरा गर्दिशों में सितारा न होता तो मैं टूट कर पारा प...

अदू को मो'तबर कर लूँ यही अरमान बाक़ी है

अदू को मो'तबर कर लूँ यही अरमान बाक़ी है भले कमज़ोर है लेकिन अभी तूफ़ान बाक़ी है फलक पर कर चुका हूँ मैं रक़म अपनी कहानी सब लिखा है अज़ सरे नौ सिर्फ़ इक उन्वान बाक़ी है जहाँ थीं बस्तियाँ ...

हक़ीक़त चाँद की सब को पता है

हक़ीक़त चाँद की सब को पता है तो क्यूँ कह दूँ तेरा रुख़ चाँद सा है पढ़ेगा  क्या  वो औरों  की लकीरें मुक़द्दर को  जो अपने  कोसता है मैं  तेरा  या  तू  मेरा  दिलकुशा है कोई  ये सोच  कर ...