मुमकिन है तुमको उसकी हक़ीक़त पता न हो मुफ़लिस जो दिख रहा है कहीं वो ख़ुदा न हो मेरी किताबे ज़ीस्त के हैं सब वरक़ उदास शायद तुम्हारा लम्स उन्हें भी मिला न हो ग़म औ' खुशी ...
बात उठी जब उसके खारे पानी की सागर ने अपनी फ़ित्रत तूफ़ानी की आख़िरकार ख़ुशी वो ख़ुद चलकर आई इक अरसे तक जिसने आनाकानी की कुदरत की हर चाल हमारे हक़ में थी हार गए जब हमने बेईमान...
मुझे उससे कोई शिकवा नहीं है तुम्हारे बिन जो ख़ुश रहता नहीं है तुम्हारा अक्स अगर तुमसा नहीं है तो आईना ही आईना नहीं है थका तो है मगर हारा नहीं है हमारा द...
गया है मरु में कौन आब के लिए उलाहने है क्यों सराब के लिए चमन में कौन ख़ार के लिए गया गया है जो भी वो गुलाब के लिए जो एक दूसरे के थे अदू वही हुये हैं दोस्त बस शराब ...
कागज़ की कश्ती पर दाँव लगाते हो तुहमत सारी लहरों को दे जाते हो हँसते हो तो चेहरा साथ नहीं देता आख़िर क्यों अपने जज़्बात छुपाते हो आँखों से अल्फ़ाज़ टपकने लगते हैं ज...
जिन्हें पता है मनाज़िल को रास्ता करना कहाँ गये वो मुसाफ़िर ज़रा पता करना चिराग़ रोज तो जलते नहीं हैं खुशियों के मुनासिब आज नहीं आँधियों हवा करना हमें तुम्हारी अगर दीद ...