न जाने क्यूँ मेहरबां हुआ है हमारे दिल में ख़ुदा बसा है कोई नफ़स पर सवार होकर हमारे भीतर उतर रहा है जिसे समझना है जो, समझ ले हक़ीक़त अपनी हमें पता है हमारे घर की हर ए...
जब हम धीरे धीरे मरने लगते हैं दीवारों पर अक्स उभरने लगते हैं शक्ल तसव्वुर में होती है जो रंगीन उसके सारे रंग उतरने लगते है कोशिश करते हैं जीवन मे रंग भ...