मेरा ख़ुशियों से साबका पूछा रात से धूप का पता पूछा अश्क़ तीमारदार थे मेरे दर्द ने हाल ज़ख़्म का पूछा ज़िन्दगी की न फ़िक्र की, उसने शुक्र है, बाइसे क़ज़ा, पूछा ...
खिलाया है जो हमने उस सुमन की आबरू रखना खिजां में भी मुहब्बत के चमन की आबरू रखना मुक़द्दस रूह तुझसे मेरी बस इतनी गुज़ारिश है कि अपने इस पुराने पैरहन की आबरू रखना भले ही ...