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Showing posts from May, 2018

मेरा ख़ुशियों से साबका पूछा

मेरा  ख़ुशियों से साबका पूछा रात  से  धूप  का  पता  पूछा अश्क़    तीमारदार   थे    मेरे दर्द  ने  हाल  ज़ख़्म  का  पूछा ज़िन्दगी की न फ़िक्र की, उसने शुक्र  है,  बाइसे   क़ज़ा,  पूछा ...

खिलाया है जो हमने उस सुमन की आबरू रखना

खिलाया है जो हमने उस सुमन की आबरू रखना खिजां में भी मुहब्बत के चमन की आबरू रखना मुक़द्दस  रूह  तुझसे  मेरी बस इतनी गुज़ारिश है कि  अपने  इस  पुराने  पैरहन की  आबरू रखना भले ही ...