अगर क़ुव्वत है तो पढ़ लो हमारी मुस्कराहट को झुकी पलकें बताओ सुन रही हैं किसकी आहट को भले मासूम चेहरे पर निगाहें थम गयीं मेरी मगर पढ़ तो चुका हूँ तेरे मन की छ...
शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी उदासी रात भर बेकल रही थी सुकूं गायब हुआ चेहरे से उसके जो देखा नब्ज़ मेरी चल रही थी गले मिलकर गला काटा फिर उसने वही फ़ित्रत दिखी जो क...
नींद के बोझ से कुछ सँभलता हुआ शम्स निकला है फिर आँख मलता हुआ ये पता अब चला ,संगे मील इस क़दर दूर लाया हमे , साथ चलता हुआ ख़्वाब मेरे थे शादाब गुल की तरह क्...
न है अब शै कोई जो चैन छीने यूँ मुत'अस्सिर किया है शायरी ने समंदर से निकलने को है दरिया किया आगाह आँखों की नमी ने नही छूटे हैं उसके दाग अब तक बहुत दिन चाँद को धोया नदी ने चला हूँ ध...