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Showing posts from June, 2018

अगर क़ुव्वत है तो पढ़ लो हमारी मुस्कराहट को

अगर  क़ुव्वत है तो  पढ़ लो  हमारी  मुस्कराहट को झुकी पलकें बताओ सुन रही हैं किसकी आहट को भले   मासूम   चेहरे  पर   निगाहें   थम   गयीं  मेरी मगर  पढ़  तो चुका  हूँ तेरे मन की  छ...

शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी

शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी उदासी  रात  भर  बेकल  रही  थी सुकूं  गायब  हुआ  चेहरे  से  उसके जो  देखा  नब्ज़  मेरी  चल रही थी गले  मिलकर गला काटा फिर उसने वही  फ़ित्रत  दिखी जो क...

नींद के बोझ से कुछ सँभलता हुआ

नींद   के  बोझ  से  कुछ  सँभलता हुआ शम्स निकला है फिर आँख मलता हुआ ये  पता  अब  चला ,संगे मील इस क़दर दूर   लाया   हमे ,  साथ   चलता   हुआ ख़्वाब  मेरे  थे  शादाब   गुल  की  तरह क्...

न है अब शै कोई जो चैन छीने

न है अब शै कोई जो चैन छीने यूँ मुत'अस्सिर किया है शायरी ने समंदर से निकलने को है दरिया किया आगाह आँखों की नमी ने नही छूटे हैं उसके दाग अब तक बहुत दिन चाँद को धोया नदी ने चला हूँ ध...