तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ हो गिला तुझसे ही तो किससे ख़ुदा शिकवा करूँ हर सुतूं मिस्मार है अब इस हिसारे जिस्म का रूह जाने को ही राज़ी है नहीं तो क्या करूँ धूप के मासू...
कोई शिकवा गिला है ही नहीं अब अदावत में मज़ा है ही नहीं अब चलो फिर इब्तिदा पर लौटते हैं उमीदे इंतिहा है ही नहीं अब ख़ुशी की जुस्तजू की क्या ज़रूरत ग़मों से वास्...