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Showing posts from July, 2018

तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ

तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ हो गिला तुझसे ही तो किससे ख़ुदा शिकवा करूँ हर सुतूं मिस्मार है अब इस हिसारे जिस्म का रूह जाने को ही राज़ी है नहीं तो क्या करूँ धूप के मासू...

कोई शिकवा गिला है ही नहीं अब

कोई शिकवा गिला है ही नहीं अब अदावत  में  मज़ा  है  ही नहीं अब चलो  फिर  इब्तिदा  पर  लौटते  हैं उमीदे   इंतिहा   है   ही  नहीं  अब ख़ुशी की जुस्तजू की क्या ज़रूरत ग़मों  से  वास्...