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खिलाया है जो हमने उस सुमन की आबरू रखना

खिलाया है जो हमने उस सुमन की आबरू रखना खिजां में भी मुहब्बत के चमन की आबरू रखना मुक़द्दस  रूह  तुझसे  मेरी बस इतनी गुज़ारिश है कि  अपने  इस  पुराने  पैरहन की  आबरू रखना भले ही ...

ख़ुद से बाहर आने की कोशिश में हूँ

ख़ुद से बाहर आने की कोशिश में हूँ मैं अपने  को  पाने की कोशिश में हूँ जीवन के बदरंग धनक पर फिर से मैं सातों  रंग चढ़ाने  की  कोशिश  में  हूँ नासमझी में  नासमझी  हो  जाती  है ख़ुद ...

ख़ुद पर अत्याचार करूँगा

ख़ुद पर अत्याचार करूँगा तुझको फिर स्वीकार करूँगा अपनी लाशा की कश्ती पर ग़म का दरिया पार करूँगा ताबीरों की ख़ातिर अपने ख़्वाबों से भी रार करूँगा आँसू  तो  मेरे  अपने  हैं उनको...

हम तुम्हें छोड़ के जन्नत भी न जाने वाले

हम  तुम्हें  छोड़  के  जन्नत भी न जाने वाले आबला   पा  के   लिए  फूल  बिछाने  वाले तेरी दुनिया मेरी दुनिया से अलग क्या होगी रस्मे  दुनिया  को हैं  हम  दोनों निभाने वाले जी  उ...

तू भले मुझको अँधेरों में अकेला कर दे

तू भले मुझको अँधेरों में अकेला कर दे मेरे  साये  को  मेरे  साथ ख़ुदाया कर दे छीन   ले  तू   भले  आँखों  से  मेरी  बीनाई तू ही हर सिम्त नज़र आये कुछ ऐसा कर दे कर  दे  ग़र्क़ाब  मुझे...

ख़ौफ़ का हर इक पसेमंज़र निकालें

ख़ौफ़ का  हर इक पसेमंज़र निकालें ज़ेहन  में  बैठे  हुए  सब  डर निकालें घुट रहा है  मेरे  ही अंदर  दम इसका रूह को अब जिस्म से बाहर निकालें बढ़ गया है दायरा परवाज़ का अब तो परिंदे भी न...

न जाने क्यूँ मेहरबां हुआ है

न जाने क्यूँ  मेहरबां  हुआ है हमारे  दिल में  ख़ुदा  बसा है कोई नफ़स पर सवार होकर हमारे  भीतर   उतर  रहा  है जिसे समझना है जो, समझ ले हक़ीक़त  अपनी  हमें  पता है हमारे  घर  की हर ए...