Posts

Showing posts from October, 2017

मेरा मंसब जनाब से कम है

मेरा मंसब जनाब से कम है रो'ब भी इस हिसाब से कम है मौत के बाद की ख़ुदा जाने ज़िन्दगी किस अज़ाब से कम है अश्क पी कर भी है ख़ुमारी सी क्या जो नश्शा शराब से कम है देखता है मगर हक़ारत से बेर...

जो तू मिला तो बेसबात ज़िन्दगी ठहर गयी

जो तू मिला तो बेसबात ज़िन्दगी  ठहर  गयी खफ़ा हुआ जो तू हमारी ज़िंदगी बिखर गयी हमारे  हौसलों  से  मौत हार  मान  कर  गयी वो छू के लौट कर गयी तो ज़िंदगी सँवर गयी बड़ी अजीब सी कशिश है ...

महरूम ख़ुद रहा जो सब में प्यार भर गया

जो ख़ुद न पा सका वो सब में प्यार भर गया इक  चारागर  इलाज़  के  बग़ैर  मर   गया अब और किस तरह बखान आपका करें जब देखते ही आपको, चेहरा निखर गया देखा जिसे उसी के दिल में हो गए मकीं यूँ आई...

दिल में दरिया के उतरकर हमसफ़र हो जायेगा

दिल में दरिया के उतरकर हमसफ़र हो जायेगा अब्र पिघला  तो समुन्दर  का जिगर हो जायेगा मुत्मइन हूँ एक दिन चूमेगी मंज़िल पाँव खुद रास्ता  ही  जब  हमारा  राहबर  हो  जायेगा प्यार वा...

जहाँ मुंसिफ़ अदल से सरगिरां है

जहाँ मुंसिफ़ अदल से सरगिरां है वहाँ  इन्साफ़  का इमकां  कहाँ है परिंदों  ने  क़फ़स  से  की  बग़ावत अब उनकी ज़द में सारा आसमां है शजर कब तक बचेंगे दश्त में जब असर  उनपर  रुतों  का ...

दिखला दे अक्से ज़ेहन भी वो आइना मिला

दिखला दे अक्से ज़ेहन भी वो आइना मिला खुद को ही  देखने  का  नया  ज़ाविया मिला राहे  बदी पे  चलने का सब को सिला मिला फिर भी  ख़ुदा से आदमी कम आश्ना मिला मंज़िल  मेरी  अलग थी अलग र...

मुहब्बत में ही तेरी दम नहीं है

मुहब्बत  में  ही तेरी दम नहीं है मेरी नीयत में कोई ख़म नहीं है मेरी ख़ुशियाँ  जो  मुझसे छीन  पाये जहां   में   ऐसा  कोई  ग़म  नहीं   है ख़ुशी से है कि है नाराज़गी से तू मेरे साथ है ...

मेरी तन्हाई पर कुछ तरस खाइये

मेरी तन्हाई पर कुछ तरस खाइये अब ख़यालों से मेरे चले जाइये रूह को दे के छाले अगर खुश हैं आप पा सकें तो इसी में सुकूं पाइये रोशनी ने तो साया बनाकर दिया आप अंधेरों से भी एक बनवाइय...

बागबां वो ही बनाये जा रहे हैं

बागबां  वो  ही  बनाये  जा  रहे  हैं गुल से जो ख़ुशबू चुराए जा रहे हैं अस्ल भी जिसका नहीं है क़र्ज़ हमपर सूद  हम  उसका  चुकाए जा रहे हैं अनकही बातें हुई  हैं बोझ लब पर होंठ हैं, बस  ...

नहीं मिलती है मंज़िल तो गिला क्या

नहीं मिलती है मंज़िल तो गिला क्या किसी की मिल्कियत  है  रास्ता क्या निकल आया है सूरज, खोल  आँखें तेरी   ख़ातिर   उगेगा   दूसरा   क्या चले   हो   फिर    मुक़द्दर   आज़माने तुम...

भले है सिफ्र मगर बेअसर नही होता

भले  है  सिफ़्र  मगर  बेअसर  नही होता बग़ैर  सिफ़्र  के  तो इक अशर नही होता अशर 10 की संख्या सफ़र  सुकून  से  अपना  तमाम होता है हमारा जब भी कोई हमसफ़र नही होता जहाँ  न  शोर  न  तकरा...

अश्क उनके तो पोंछ आये हम

अश्क उनके तो पोंछ आये हम ख़ुद मगर मुस्करा न पाये हम छाँव औलाद के लिए बनकर धूप का लुत्फ़ ख़ूब उठाए हम घर मकां को बना नहीं पाते तोड़ते हैं बसे बसाये हम शह्र ने ख्वाब भी नहीं बख़्शे गा...

ज़ाहिरन ख़ुश जो था कई दिन से

ज़ाहिरन ख़ुश जो था कई दिन से रो  रहा  था  सुना,  कई   दिन  से क्या हुए सब अमां के मुतमन्नी पुरसुकूं  है  फ़ज़ा  कई  दिन  से ख़ुशबुओं की तलाश में शायद है  परीशां  हवा  कई  दिन  से बात ...

दस्तयाबी को झुका जर्फ़े शजर तो देखिये

दस्तयाबी को झुका जर्फ़े शजर तो देखिये बर्ग के पर्दे में पोशीदा समर तो देखिये तितलियों के रंग से अत्फ़ाल खौफ़ आलूद हैं मज़हबी तालीम का उनपर असर तो देखिये मुतमइन है मंज़िले मक़्स...

बशर को ढाई आखर का अगर संज्ञान हो जाए

बशर को ढाई आखर का अगर संज्ञान हो जाए वही गुरुग्रंथ गीता बाइबिल क़ुर्आन हो जाए मजाज़ी औ हक़ीक़ी इश्क का मीज़ान हो जाए मेरा इजहार यारों मीर का दीवान हो जाए जलाकर ख़ाक कर मुझको म...

ऐसी तरकीब कोई दोस्त सुझाये मुझको

ऐसी तरकीब कोई दोस्त सुझाये मुझको नींद भर सो लूँ कोई ख़्वाब न आये मुझको मुश्किलें मुझ पे जब आयीं तो कई साथ आयीं मुझसे डरती हैं वो क्यूँ, कोई बताये मुझको ख़्वाब में सुल्ह का रस्त...

किनारा मौत ने जिस से किया हो

किनारा मौत ने जिस से किया हो उसे फिर जिंदगी से क्यूँ गिला हो करेंगे अब उन्ही पर हम भरोसा जिन्हें पहले नहीं देखा सुना हो कभी जब ज़िंदगी हम को मिलेगी तो पूछेंगे कि "हमसे क्यूँ ख...

ये ज़मीं जब खून से तर हो गयी है

ये ज़मीं जब खून से तर हो गयी है ज़िंदगी कहते हैं बेहतर हो गयी है आप दरिया से समुन्दर हो गए और तिश्नगी मेरा मुक़द्दर हो गयी है अब सुख़नवर आग उगलेंगे क़लम से ख़ुदसरी शर की उजागर हो ग...

नाम से तुमको पुकारा जायेगा

नाम से तुमको पुकारा जायेगा दर्द मेरा फिर उभारा जायेगा इक न इक मेरा सहारा जायेगा तुम मिलोगे, ग़म तुम्हारा जायेगा मंज़िले मक़सूद तक दरिया के साथ ज़ख्म खाकर भी किनारा जायेगा दफ़्...

लोग कहते हैं कि तू कोई वली या पीर है

लोग कहते हैं कि तू कोई वली या पीर है सच तो ये है, ख़ुद की तू रूठी हुई तक़दीर है बाँटता है क्यों उसे भगवान और अल्लाह में सरफिरे इंसान क्या वो मूरिसी जागीर है जीस्त के कनवास पर जो खी...

थक गया था तू बहुत फिर भी न हारा शुक्रिया

थक गया था तू बहुत फिर भी न हारा शुक्रिया तेरी हिम्मत ने दिया मुझको सहारा शुक्रिया पास मेरे कुछ नहीं था जो कि दे पाता तुझे तेरी सुहबत में हुआ फिर भी गुजारा शुक्रिया ख़्वाहिशे...

बहुत दम है तो ये करके दिखा दो

बहुत दम है तो ये करके दिखा दो किनारों  के  बिना  दरिया बहा दो भले  हँस लो  मेरी नाकामियों पर नहीं  डूबे  जो  वो  सूरज  उगा दो बिछी  है  चाँदनी  जो  छत  पे मेरे उसे  तुम  बाम  स...

हमारे दरमियां शायद बची कोई कहानी है

हमारे दरमियां शायद बची कोई कहानी है अभी पलकें न झपकाना, अभी आँखों में पानी है उबलती रेत से उम्मीद की इतनी कहानी है हमारे पाँव के छालों में भी थोड़ा सा पानी है हमारा दिल किसी क...

अगर मंज़ूर कर लो तुम हमारी हीर हो जाना

अगर मंज़ूर कर लो तुम हमारी हीर हो जाना करें  मंज़ूर  हम  दीवार  पर  तस्वीर हो जाना मेरी अकड़ी हुई गर्दन से शिकवा है अगर तुमको मुनासिब ही है शीरींकार का शमशीर हो जाना अगर हो मुत...

ज़िंदगी में यही इक कमी रह गयी

ज़िंदगी में यही इक कमी रह गयी दूर  मुझसे मेरी ज़िन्दगी रह गयी चाह थी, जीते जी मौत को देख लूँ आख़िरी एक ख़्वाहिश यही रह गयी कितने  झरनों  को  खुद  में  समेटे  नदी बस समुन्दर की बन क...

बात होती है अयाँ आँख मिला कर देखो

बात होती है अयाँ आँख मिला कर देखो दर्द माँ बाप से तुम अपना छुपा कर देखो फड़फड़ाहट सी फ़िज़ाओं में बिखर जायेगी शाख पर लौटे परिंदों को उड़ा कर देखो गम सहोदर का किसी को भी रुला सकता ...

रखे जो याद उसको भूल जाना है बहुत मुश्किल

रखे जो याद उसको भूल जाना है बहुत मुश्किल लिए तूफ़ान दिल में, मुस्कराना है बहुत मुश्किल खुला करते हैं जिगरी दोस्तों में राज सब दिल के हर इक के सामने पल्लू गिराना है बहुत मुश्क...

सब की किस्मत ख़राब है यारों

अपनी किस्मत ख़राब है यारों हर  कुएँ  में शराब  है  यारों मेरे   दुश्मन   मुरीद   हैं   मेरे ये  मुकम्मल  अजाब है यारों जिनको काली घटा सी कहते हो श्वेत लट पर खिजाब है यारों द...

हदे सहरा सराबों से बनी है

हदे सहरा सराबों से बनी है तो फिर हर सू वहाँ क्यूँ तिश्नगी है ख़ुदाया और इक सूरज बना दे जहां में अब बला की तीरग़ी है किसी की जुस्तजू कब तक करें हम हमारी भी तो कोई ज़िंदगी है मुनासि...