दिखला दे अक्से ज़ेहन भी वो आइना मिला
दिखला दे अक्से ज़ेहन भी वो आइना मिला
खुद को ही देखने का नया ज़ाविया मिला
राहे बदी पे चलने का सब को सिला मिला
फिर भी ख़ुदा से आदमी कम आश्ना मिला
मंज़िल मेरी अलग थी अलग रास्ता मिला
मुझको सफ़र में रहनुमा भी पारसा मिला
रस्ता ही राहबर हो तो मंज़िल की फ़िक्र क्यूँ
था अज़्म तो बशर से ख़ुद आकर ख़ुदा मिला
ख़्वाहिश बशर की चाल, चुनौती ख़ुदा की चाल
शतरंज सब के साथ ख़ुदा खेलता मिला
साये में मेरे बैठ गयी यूँ शदीद धूप
सहरा में जैसे कोई उसे आसरा मिला
आँखों को मेरी कैसी अज़ब रौशनी मिली
हर आदमी में कोई मुझे दूसरा मिला
शख़्सीयत अपनी क्या है पता ही नहीं मुझे
किरदार रोज़ रोज़ ही मुझको नया मिला
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