जाने कैसे जिस्म सब का ख़ून आलूदा1 हुआ
जाने कैसे जिस्म सब का ख़ून आलूदा1 हुआ
जब से आँखों में चुभा है ख़्वाब इक टूटा हुआ
इक बहायेगा, करेगा दूसरा सब अश्क जज़्ब
दर्दो ग़म में कम से कम इतना तो समझौता हुआ
ग़म के मारे एक हम ही तो नहीं हैं दहर2 में
क्यूँ हमीं फिरते रहें चेहरा लिये रोता हुआ
अपने हिस्से की भी ख़ुशियाँ भाइयों में बाँट कर
ख़ुश बहुत हूँ, काम मुझसे एक तो अच्छा हुआ
जब हुई बेटी विदा तो घर हुआ वीरान यूँ
जैसे लहराता समुन्दर सूख कर सहरा हुआ
रास्ता खोजे तो खोजे कैसे कोई अम्न का
जब कि सारा शहर ही है दश्त3 सा बिखरा हुआ
तू नहीं था तब मेरी दुनिया बहुत वीरान थी
इक तेरे होने से देख अब मोजिज़ा4 कैसा हुआ
मैं दुआओं की सनद बनकर बता कब तक जियूँ
जाँकनी5 में पूछता है इक बशर लेटा हुआ
1 रक्त रंजित
2 संसार
3 जंगल
4 चमत्कार
5 मरणासन्न अवस्था
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