न तो शोर है न ही ख़ामुशी, किसी गुंग की ये सदा है क्या
न तो शोर है न ही ख़ामुशी, किसी गुंग की ये सदा है क्या
तू मेरे ख़ुदा मुझे ये बता, किसी और ढब की फ़ज़ा है क्या
कभी नागहां सरे राह भी मेरे रूबरू तू हुआ है क्या
तुझे फिर भी मान लूँ ज़िन्दगी, अब इसी में तेरी रज़ा है क्या
मैं ग़रीब हूँ तू अमीर है, मैं हूँ ग़मज़दा, तू है शादमां
कई बार मुझको लगा है ये, तेरा और कोई ख़ुदा है क्या
मुझे क्या मिलेगा तू ही बता, हैं रक़ीब कितने ये जानकर
तुझे सिर्फ़ अपना ही मान कर, रहूँ ख़ुश अगर तो बुरा है क्या
तेरे रुख़ पे दाग़ तो हैं नहीं, न तलाश तू उन्हें बेसबब
तेरे रूख़ का अक्से हसीं है वो, कभी चाँद ने ये कहा है क्या
तू सराब सा मेरे गिर्द है, मुझे दस्तयाब मगर नहीं
मेरी तिश्नगी है मरज़ अगर, तेरे पास इसकी दवा है क्या
मेरी ज़िन्दगी में रहा है तू, मुझे जनता है क़रीब से
कभी आके फिर ये पता तो कर, मेरे ज़हन में तू बचा है क्या
तुझे प्यार करता हूँ सच है ये, हूँ गुलाम तेरा ये सच नहीं
तुझे हर नफ़स का हिसाब दूँ, मेरी ज़िंदगी! तू क़ज़ा है क्या
तेरी हार में मेरी हार हो, तेरी जीत में मेरी जीत हो
यही हार जीत का सिलसिला मेरी दोस्ती का सिला है क्या
वो जो आसमान पे चाँद है, लिए रोशनी भी उधार की
ये जो चाँदनी की चमक बढ़ी, उसे नूर तूने दिया है क्या
11212 11212 11212 11212
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