शजर का परिंदे से रिश्ता नहीं है

शजर का परिंदे से रिश्ता नहीं है
मगर फ़िक्र है, क्यूँ वो लौटा नहीं है

मुक़द्दर ने हमको दिया क्या नहीं है
हमें ज़िन्दगी! कोई शिकवा नहीं है

जो ठहरा हुआ है हर इक बर्गे गुल पर
वो आँसू है, शबनम का कतरा नहीं है

बचा है अभी मेरी आँखों का पानी
जो खून आज तक इनमें उतरा नहीं है

मेरी ख़ूबियों को मिले यूँ तवज्जोह
मेरी ख़ामियों को गवारा नहीं है

कई बार अब तक दिया तूने धोखा
मुझे मौत! तुझपर भरोसा नहीं है

सुनाते रहेंगे हम अपनी कहानी
तू जब तक इसे सुन के रोता नहीं है

हड़प्पा मोहनजोदड़ो में मिला जो
किसी की वरासत का हिस्सा नहीं है

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