नए दौर की शायरी में मज़ा है


नए   दौर   की   शायरी   में  मज़ा  है
ज़ुदा इसका मफ़हूम बिल्कुल नया है

भले बह्र थोड़ी सी भटके तो क्या है
ज़बां से जो निकले वही क़ाफ़िया है

समुंदर को नदियों में तक़सीम कर दें
सुना  है  कि  ये  एक अद्भुत कला है

कुछ  अल्फ़ाज़  भारी  से  उर्दू ज़ुबां के
म'आनी  हों  कुछ  भी  हमें सीखना है

भले  आप  मफ़हूम समझें, न समझें
करें   वाह   वा  फ़र्ज़  ये  आपका  है

हवा  को  निचोड़े  नदी  को  जला  दे
वही  आज   शायर  नए  दौर  का  है

हमीं रह गए यार जाहिल के जाहिल
समझ  ही  न  पाए  नया  दौर क्या है

समझना पड़ेगा हमें अब कि  ख़ुशबू
चमन से चुराने का क्या फ़लसफ़ा है

रदीफ़ ऐसे  चिपकी  है बच्चे को जैसे
सिफारिश से ही दाख़िला मिल गया है

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