ज़िन्दगी आसान करने के लिए


ज़िन्दगी  आसान  करने  के  लिए
लाज़िमी  है  मुश्किलों  से  खेलिए

जब  मकीं  दिल में कोई है ही नहीं
साँस हम लेते हैं फिर किसके लिए

बारहा  हमको   जहां   में  भेजकर
ज़िन्दगी  ने  मौत  से  बदले   लिए

है  परिंदों   को  भी  इल्मे  फ़र्ज़  जो
उड़  रहे  हैं  चोंच  में  तिनके  लिए

तीरगी! तू   भी   दिये   से   माँग  ले
रौशनी कुछ, ख़ास कर अपने लिए

हो न हो  इक दिन मिले हर ज़िन्दगी
मौत  के  दर  पर  खड़ी  कासे  लिए

जी लिया, मर भी लिया  तू  जीते जी
'शेष'  अब   क्या  है  यहाँ   तेरे   लिए

शेषधर तिवारी
20 9 2017

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