किसने ये कहा जोशे जिगर टूट चुका है
किसने ये कहा जोशे जिगर टूट चुका है
तलवार तो है, क्या जो सिपर1 टूट चुका है
हालात की लहरों के लगे चंद थपेड़े
साहिल के घरौंदों सा बशर टूट चुका है
तिनकों से जहाँ हमने बनाया था नशेमन2
अब जाएँ कहाँ हम वो खड़र टूट चुका है
दस्तार सम्हाले हुए है मुल्क का बाशी3
इस तर्ह कि हर बानिए-शर4 टूट चुका है
है कोई गुनहगार मकीं जिस्म में तेरे
तू रूह से पाकर ये ख़बर टूट चुका है
महलों में बहुत शान से रहते हैं जो कुनबे
उनको है कहाँ इल्म कि घर टूट चुका है
खुश था कि सराबों ने मेरी प्यास बुझा दी
था ख़्वाब जो होते ही सहर5 टूट चुका है
1 ढाल 2 घोसला 3 नायक, सरदार
4 उपद्रवी 5 सुबह होने तक
शेषधर तिवारी
28 09 2017
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