समंदर ने जब भी किनारा किया


समंदर ने जब भी किनारा किया
नुमू  हो  क़मर  ने  इशारा  किया

मेरे  साथ  साहिल भी रोता रहा
समंदर को यूँ  हमने खारा किया

भले  बाप  कदमो में  कर ले जहां
पर औलाद से अपनी हारा किया

पता  था  हमें  वो  न आएगा अब
न जाने ये दिल क्यूँ पुकारा किया

कहाँ   ढूँढते   दश्त  में  आशियाँ
शज़र को ही हमने सहारा किया

दुआओं  की  तासीर  मत  पूछिए
इन्ही   के   सहारे   गुजारा  किया

रगे  अब्र  तक़दीर  लिखने को थी
मुक़द्दर  ने   उल्टा   इशारा  किया

जहां  में  नहीं  कोई  साथी  मिला
तो  दुश्मन  को  मैंने गवारा किया

खुदा  तू  बुढापा   बनाता  है  क्यूँ
कि  बेटों  ने  ही  बेसहारा   किया

जो कुफ्फ़ार की महफ़िलें थीं उन्हें
तहीयत  का  हमने  इदारा  किया

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