बहुत आसान है मेरे लिए, मग़रूर हो जाना
बहुत आसान है मेरे लिए, मग़रूर हो जाना
मगर मुश्किल है शख़्सीयत से अपनी दूर हो जाना
हक़ीक़त से तो आसानी से आँखें फेर लेता हूँ
मगर कैसे सहूँ ख़्वाबों का चकनाचूर हो जाना
तुम्हारी दोस्ती का लुत्फ़ छिन जाने से डरता हूँ
बहुत मसरूफ़ कर देगा तुम्हें, मशहूर हो जाना
मुझे मंज़ूर है तर्के त'अल्लुक पर नहीं मंज़ूर
तसव्वुर से भी मेरे यूँ तेरा काफ़ूर हो जाना
मेरे हालात पर समझे न दुनिया बेवफ़ा तुमको
दिखावे को सही, तुम भी ज़रा रंजूर हो जाना
सराहा जायेगा, तेरा बग़ावत करके दुनिया से-
किसी गुर्बतज़दा की माँग का सिन्दूर हो जाना
समझ पाया नहीं कोई भी दरियाओं का ख़ुद जाकर
समुंदर में फ़ना होने को यूँ मज़बूर हो जाना
कभी जो वक़्ते ज़ालिम छीन ले आँखों से बीनाई
तो नूरे चश्म! तुम आँखों का मेरी नूर हो जाना
हरा रखने की ज़िद में ख़ुद जिसे पैहम कुरेदा था
मुझे अच्छा लगा उस ज़ख़्म का नासूर हो जाना
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