आँखें ख़ुद उनकी थीं आमादा बताने के लिए

आँखें  ख़ुद  उनकी थीं  आमादा  बताने के लिए
सच उन्हीं का जो थे पुरसिश में दिखाने के लिए

झुक सकेगा क्या ? ज़मीं का प्यार पाने के लिए
आसमां  को  दी  बुलंदी,  आज़माने   के   लिए

हम  तो   हैं   तैयार   सीने  से   लगाने  के  लिए
तुम बढ़ा दो हाथ अगर हँस कर मिलाने ले लिए

जो हँसे तो बस किसी का दिल जलाने के लिए
वो  तरस जाते  हैं  अक्सर  मुस्कराने  के लिए

ज़ेरे-दाम आये तो बस सैय्याद का मुह देखकर
वर्ना  हम  और  पर  हिलाते  एक दाने के लिए ?

रख़्शे दिल की लग़्ज़िशी रफ्तार का बाइस है तू
एड़  भी  आकर  लगा  इसको  गिराने  के लिए

ग़म  सहे,  आँसू  बहाए,  दर-ब-दर  फिरते  रहे
की हर इक कोशिश मकां को घर बनाने के लिए

कुंद  कर  ले  धार  नेज़े  की  तब  आएगा  मज़ा
कब से मक़तल पर झुका हूँ सर कटाने के लिए

है कहाँ मुमकिन कि हर इक ख़्वाब की ताबीर हो
ये  हक़ीक़त  ही  बहुत  है  नींद उड़ाने  के   लिए

सिर्फ़  कुछ  साँसें  बची  हैं  ले  जिसे  दरकार हो
और  कुछ  बाक़ी  नहीं  है  अब  लुटाने  के लिए

आदमी  से  जब  बने  इंसां  तो  जागी  ये  उमीद
काश! हम  कर जाएँ  कुछ  सारे  जमाने के लिए

अलविदा रस्मन कहा और मुस्कराकर चल दिया
ग़म   यही  है  अब  न  आएगा   सताने   के   लिए

Comments

Popular posts from this blog

शबे वस्ल ऐसे उसको खल रही थी

पर्वत हमारी पीर का आख़िर पिघल गया

मेरा ख़ुशियों से साबका पूछा