या और बड़ी सी चादर दे

या और बड़ी सी चादर दे
या क़द मेरा छोटा कर दे

मुझको दे सारा ज़हर मगर
सबको अमृत की गागर दे

मैं तो बदतर का आदी हूँ
औरों को जीवन बेहतर दे

ख़्वाहिश है छू लूँ आसमान
मुझको भी पंछी सा पर दे

जिनके ज़हनों में मंज़िल है
उनको रास्ता दे, रहबर दे

ग़म से है जिनका आज भरा
उनका कल खुशियों से भर दे

बाक़ी दिन सुख से काट सकूँ
मुझको इक छोटा सा घर दे

मेरा दिल भी इक दरिया है
उसको भी  एक  समंदर दे

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