ख़्वाब तुम्हारा मैंने कुछ ऐसे देखा है
ख़्वाब तुम्हारा मैंने कुछ ऐसे देखा है
वीराने में शीशमहल बनते देखा है
उसकी ख़ुशहाली से शाद हुआ हूँ मैं भी
जिसको दुःख में सोने सा तपते देखा है
यह कह कर उत्साह बढ़ाती है बैसाखी
तुम जैसों को भी मंज़िल पाते देखा है
जो आँखें दुनिया को देख नहीं पातीं हैं
उन आँखों से भी आँसू बहते देखा है
सारा जीवन ज़ुल्मत में बीता है जिसका
दीपक उसके शव के सिरहाने देखा है
एक अधूरा सपना लेकर सब जीते हैं
अपने सपने सच होते मैंने देखा है
मेरे अपनों ने वो हाल किया है मेरा
जिस पर मैंने दुश्मन को रोते देखा है
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