जाएगा बुरा वक़्त भी मुझको ये यकीं है
जाएगा बुरा वक़्त भी मुझको ये यकीं है
साबूत मेरे पाँव के नीचे की ज़मीं है
इक मेरी भी मुमताज है ऐ शाहजहां सुन
दिल में जो मेरे शादमां ज़िंदा ही मकीं है
जो शाखे समरदार है दीवार के उस पार
वो मेरे मुकद्दर में नहीं है तो नहीं है
इस जिस्मे तनावर को हो ज़ख्मों से गिला क्यूँ
दस्तार का हर पेंच मेरे सर पे वहीं है
आदम के गुनह की तू सज़ा काट ले इंसान
जन्नत का पता ढूंढ ले दोज़ख़ तो यहीं है
देखे तो कोई अहले मुसव्विर के हसीं नक्श
इनमें ही मेरे दिल का गुनहगार कहीं है
मां तेरी दुआओं से हैं महफूज़ शब-ओ-रोज़
तेरे ही तो कदमों में वो फिरदौसे बरीं है
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