रौशनी ही रौशनी आँखों में है

रौशनी  ही  रौशनी  आँखों  में  है
वक़्ते मर्ग इसकी खुशी आँखों में है

हर बचश्मेनम को तस्कीं दे खुदा
इनका सच मेरी खुली आँखों में है

सरनिगूँ  मह्वे  दुआ  है  हर  कोई
हर  दुआ  इनकी  मेरी आँखों में है

रो  रहे  हैं  लोग,  मैं  हूँ  बेख़बर
जाने  कैसी  बेहिसी  आँखों  में है

ज़िंदगी  में  जो किया अच्छा बुरा
हर  बदी  नेकी  मेरी  आँखों में है

साफ़  दिखलाई  पड़े  चेहरे  मुझे
इस क़दर पाकीज़गी आँखों में है

नर्म हाथ आकर इसे कर दें रिहा
मुस्तरक़ जो ज़िंदगी आँखों में है

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