तुम्हारी ज़ुल्फ़ चेहरे पर ठहर जाती तो अच्छा था
तुम्हारी ज़ुल्फ़ चेहरे पर ठहर जाती तो अच्छा था
अगर ये ईद का ऐलान करवाती तो अच्छा था
दिखा करती है बेकल चांदनी जो बाम पर तनहा
किसी दिन काश जीने से उतर आती तो अच्छा था
ख़ुदा तूने बिगाड़ा है हमें देकर तड़पता दिल
सुधरने की भी कुछ सूरत नज़र आती तो अच्छा था
तलातुम में अगर तुम दफ़'अतन मुझसे लिपट जाते
तो फिर गिर्दाब में कश्ती उतर जाती तो अच्छा था
सियह-फाम अब्र हैं, बादेसबा है, साथ तुम भी हो
इसी लम्हे पे ये दुनिया ठहर जाती तो अच्छा था
तेरी ख़ातिर अदू से भी राफ़ाक़त कर लिया लेकिन
मेरी हालत पे तेरी आँख भर आती तो अच्छा था
कहानी में तुम्हारी जिक्र होता कुछ हमारा भी
हमारे नाम को उनवान कर जाती तो अच्छा था
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