न सोचें आइना चिटका हुआ है
न सोचें आइना चिटका हुआ है
हमारा अक्से-दिल दिखला रहा है
मैं उसका और वो मेरा दिलकुशा है
रक़ीब इस बात से दुबला हुआ है
यक़ीनन तल्ख़ है पर है हक़ीक़त
सभी के खून में पानी मिला है
हसीनों दूर रहना कुछ दिनों तक
मेरी आँखों का रोज़ा चल रहा है
मेरी तस्वीर धुँधली हो गई या
पसे दीवार कोई रो रहा है
जिसे देखा नहीं हमने अभी तक
तसव्वुर में वो कैसे बस गया है
पड़ी इतनी ज़ियादा धूप इसपर
कहाँ अब आईना सच बोलता है
लकीरें हाथ की ये पूछती हैं
बहाने क्यूँ बनाना चाहता है
हक़ीक़त चाँद की जाहिर है, कैसे
कहूँ चेहरा तुम्हारा चाँद सा है
तेरे चेहरे को जो सूरज सा कह दूँ
तो फिर अंज़ाम बस मेरी क़ज़ा है
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