ऐ मेरे अदू हमको, तुझसा न मिला कोई
ऐ मेरे अदू हमको, तुझसा न मिला कोई
दुश्मन को नहीं देता, जीने की दुआ कोई
कोशिश में जला बैठे, हम अपनी हथेली को
आंधी में चराग़ अब तक, हमसे न जला कोई
तक़दीर तेरी लिख दी,जब तेरे ही हाथों पर
क्या फिर भी गिला तेरा, सुन लेगा खुदा कोई
हम अपनी ही फ़ित्रत से, मज़बूर रहे ऐसे
दे पाये ज़फा की भी, तुझको न सज़ा कोई
महफूज़ है आँखों में, हर दर्द मिरे अब तक
ख़्वाहिश भी नहीं मेरी, पाऊँ मैं दवा कोई
इस दौर के बच्चों की, हर बात निराली है
रस्ते पे ही मंज़िल का, ढूंढें है पता कोई
शिकवा है नहीं कोई, जब हमको अदू से भी
फिर शिकवा रफ़ीक़ों से, क्यूँ होगा भला कोई
इस पार वही चेहरा, उस पार वही चेहरा
सूरत को निखारे जो, दरपन न बना कोई
जो दर्द थे लावारिस, अपनाया उन्हें हमने
तुम तक जो पहुँच पाये, बाक़ी न रखा कोई
Comments
Post a Comment