तभी क्यूँ शक्ल पहचानी हमारी

तभी क्यूँ शक्ल पहचानी हमारी
नज़र  आयी  जब उर्यानी हमारी

छुपा  पाते  नहीं  जज़्बात  अपने
यही   तो   है   परेशानी  हमारी

हुए सैराब जिस सहरा की ख़ातिर
उसे  लगती   है   नादानी   हमारी

जलाकर राख कर देगी तुझे भी
बुझी आँखों की तुगियानी हमारी

हमें  मशहूर  कर  देगी  यक़ीनन
भले   है  ज़िन्दगी   फ़ानी  हमारी

कहा था  काम  आयेंगे  हमीं पर
अदू  ने  बात  कब  मानी हमारी

कहानी को हक़ीक़त मत समझना
कहा  करती  थी  ये  नानी  हमारी

निगाहों में जो ख़ुद की गिर चुके हैं
करेंगे    वो    निगहबानी   हमारी

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