तुझको भी मरना है क्या मालूम नहीं है

तुझको भी मरना है क्या मालूम नहीं है
रहने  दे  इतना  भी  तू  मासूम  नहीं  है

ज़ख़्म  दिये  जो  तूने  उनको भरना चाहे
जिस्म हमारा इतना भी महज़ूम* नहीं है
परास्त, हारा हुआ

सहता  है  दिन  रात  थपेड़े  सागर के वो
साहिल  है  कोई  वक़्ती  मज़लूम  नहीं है

खुशियों  की  आपाधापी  में भूल  गया तू
ग़म  जैसी  शै  से  कोई  महरूम  नहीं  है

एक ग़ज़ल है जीवन लफ़्फ़ाजी है जिसमे
एक  शेर  का भी अच्छा मफ़हूम नहीं  है

बेटी  थी, ससुराल  गई  बेटा  विदेश  में-
ख़ुश है,  बाप अकेला भी मगमूम नहीं है

मख़्दूम स्वामी
मक़्तूम  गुप्त
मक़्सूम  विभाजित
मख़्तूम मुद्रांकित, बंद किया हुआ
मगमूम दुखी
मज्ज़ूम  निश्चित यक़ीनी
मज़्मूम  अश्लील, फूहड़
मरसूम  कानूनी, चिन्हित
मलूम   निंदित

Comments