में हूँ दीपक और इक तूफ़ान हो तुम

में हूँ दीपक और इक तूफ़ान हो तुम
लड़  रहा  हूँ मैं  मगर  हैरान हो तुम

प्यार और मुझसे, बहुत नादान हो तुम
एक  मुफ़लिस  के यहाँ मेहमान हो तुम

सुन रहा है देर से जिसको ज़माना
वो कहानी है मेरी, उन्वान हो तुम

कौन समझेगा तसव्वुर को तुम्हारे
थरथराते होंठ की मुस्कान हो तुम

आओ मिलकर दहर में ख़ुशबू बिखेरें
मैं दहक जाऊँ, अगर लोबान हो तुम

दफ़्न हैं खुशियाँ हमारी सब तुम्हीं में
क्या पता था एक क़ब्रिस्तान हो तुम

झूठ है या सच, तुम्हे मालूम होगा
मैं तो कहता हूँ , मेरा ईमान हो तुम

हँस दिया तो हाल क्या होगा तुम्हारा
मुस्कराहट पर ही जो क़ुर्बान हो तुम

पाँव के छाले हँसे, जब राह बोली-
मेरी फित्रत से अभी अंजान हो तुम

सामने कुछ, पीठ पीछे और कुछ हो
दोस्त हो या ठेठ पाकिस्तान हो तुम



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