जब ख़ुदी से ही किनारा कर लिया

जब  ख़ुदी  से ही किनारा कर लिया
ख़ुद को ही अपना सहारा कर लिया

डूबते   के   साथ   थे   तिनके   कई
आख़िरश सब ने किनारा कर लिया

चाँद  धरती  के  नहीं  देते  थे  भाव
मैंने  खुद  को  एक  तारा कर लिया

जब  सज़ा  में  ही  मज़ा  आने लगा
जुर्म  पिछला  ही  दुबारा कर लिया

आज़माना  था  ख़ुद  अपने सब्र को
ज़ालिमों  से  भाई  चारा  कर  लिया

शह पे आँधी की, बज़ाहिर - राख  ने
फिर  से  अपने को शरारा कर लिया

जब  ख़ुशी  इसमें ही मिलनी है उन्हें
टूटना    मैंने    गवारा    कर    लिया

पढ़  लिया  अपना  तसव्वुर  'शेष'  ने
और  उसका इश्तिआरा  कर  लिया

20 09 2017

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