चाहे जैसी भी कहानी लिखना

चाहे  जैसी भी  कहानी  लिखना
आग  के  साथ ही पानी लिखना

जब मुहब्बत के म'आनी लिखना
तुम  इसे  जज़्बाए  फ़ानी लिखना

रेत  पर  मैं  जो  बना लूँ  इक घर
तुम भी सहरा  में  रवानी लिखना

जब  कहानी हो  रक़म दरिया की
उसका  उन्वान  जवानी  लिखना

दोस्तों  का  जो  ज़िक्र  करना  हो
हँस के तुम दुश्मने जानी लिखना

मुफ़लिसी  भूख  से  बेहाल  मिले
तो  उसे  रात  की  रानी  लिखना

जब  नया  शेर  कोई  कहना  हो
पहले उस शेर का सानी लिखना

काटनी  हो  जो  शबे  हिज़्र  तुझे
तू   उसे   रात   सुहानी  लिखना

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