वो भले बन पैकरे-शिकवा-गिला मिलती रहे

वो भले बन पैकरे-शिकवा-गिला मिलती रहे
बस  ज़रूरी  है कि हमसे बारहा मिलती रहे

नाउमीदी  में  भी  रहती  है  तवक़्क़ो  ये  मुझे
कुछ तो हासिल हो भले ही बद्दुआ मिलती रहे

मुझको  तनहा  करने वाले, मेरी ख़्वाहिश है, तुझे
ज़िन्दगी भर दिल धड़कने की सज़ा मिलती रहे

मैं करूँगा सारे नाकरदा गुनाहों को क़ुबूल
मुझको एवज में जो किस्तों में क़ज़ा मिलती रहे

हों सफर कितने भी मुश्किल कर ही लूँगा तै अगर
बन के मुझको तू मनाज़िल का पता मिलती रहे

मौत पाने के लिए क्या ये मुनासिब है, मुझे
साँस  लेने  की  सज़ा यूँ नारवा मिलती रहे

मंज़िलें  मक़सूद  का  रस्ता  हो  आसां  जो तेरी
शादमानी  की  ख़बर बस जा ब जा मिलती रहे

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