वो रहे ख़ामोश तो कोई ख़ता उनकी न थी

वो  रहे  ख़ामोश  तो  कोई  ख़ता  उनकी न थी
ठीक  से  हैरत  मेरे  चेहरे  पे  ही  उभरी  न थी

अश्क़  आँखों  में  नहीं थे  होंठ  बे-जुम्बिश  रहे
इस तरह तो तर्जुमानी दिल की हो सकती न थी

मेरी हर  उस  बात  पर  तुम  मुस्कराते थे, जिसे
हम  बहुत  अच्छी समझते थे  मगर अच्छी न थी

आज  फिर  सुनते रहे हम वो कहानी सुबह तक
जो शुरू होकर हर इक शब ख़त्म होती ही न थी

आपके  चेहरे  को  देखा  तो  यक़ीन आया  मुझे
चाँद  अहले  हुस्न है  ये बात  तो  सच्ची  न  थी

आज थोड़ा मुज़महिल  सा था ज़रा ग़मगीन था
मैकदे  पहुँचा  था,  पीने  की  मगर  मर्ज़ी न थी।

आब आँखों में छुपाकर आप उठे और चल दिये
इस  तरह  तौहीन  मेरी  प्यास  की करनी न थी

मौत की दहशत से डरकर मर  गए  होंगे  कई 
दब के उस कश्ती के नीचे जो कभी डूबी न थी

गश्त  में  यह  देख  कर  सूरज  बहुत  गुस्से में है
कर  गया  है  वो  बशर जिसकी ज़रूरत ही न थी

खींच  लाता  हूँ  किनारे, ग़र्क़  हो  जाती  हैं  फिर
प्यास आँखों  की  मगर  पानी से तो बुझनी न थी

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