वो दरिया की रवानी पर फ़िदा है
वो दरिया की रवानी पर फ़िदा है
तभी पत्थर नदी में बह गया है
शनासा भी बदल लेते हैं रस्ता
मेरे माथे पे क्या मुफ़्लिस लिखा है
किसी को भी बना सकता है पानी
बज़ाहिर ख़ुद जो पत्थर हो गया है
हमें उस हाल में जीना पड़ा है
बशर ख़ुद मौत जिसमें माँगता है
ये कैसी लग्ज़िशे पा है कि मैकश
तेरे क़दमों में ही आकर गिरा है
ख़यालों में ही रक्खा है संजोकर
कहाँ आँखों से तू मेरी बहा है
अब उसकी ज़ात पत्थर हो गयी क्या
तू जिस इंसां की पूजा कर रहा है
सबक़ सीखा नहीं क्या मुझसे पत्थर!
ज़रा सी चोट पर जो टूटता है
भले टुकड़े हुये हैं आइने के
मेरा चेहरा सभी में एक सा है
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