फ़ुर्सत हो तुझको तो मेरी, सच्ची एक कहानी लिख


फ़ुर्सत हो तुझको तो मेरी, सच्ची एक कहानी लिख

पहले गर्म हवाएँ, बादल, फिर तू पानी पानी लिख


आज  पराए  हैं  जो, कल तक वो तेरे अपने ही  थे

रिश्तों में  तल्ख़ी से पहले, तू  अपनी नादानी लिख


सच के आँसू कब तक पोंछेगा तू अपनी पलकों से

इसको  रोने  धोने  दे,  तू   हँसती  बेईमानी  लिख


उसके सब जज़्बात वरक़ पर साफ़ रक़म हो जायेंगे

होंठों की सुर्ख़ी से पहले ,अबरू और पेशानी लिख


दिल की बातें भी लिख देना पहले आँखें तो पढ़ ले

आँसू से पहले  तू  उसकी, आँखों  में  हैरानी लिख


जब भी मैं राहें लिखता हूँ , तू मुश्किल लिख देता है

ऐसी भी क्या नाराज़ी है, मंज़िल और आसानी लिख


मैं सहरा को सागर लिख दूँ इसमें क्या मुश्किल होगी

तू  लेकिन  ठहरे  पानी  में  भी  लहरें  तूफानी लिख


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