ख़ुदपरस्ती में आदिली कर ली


ख़ुदपरस्ती में आदिली कर ली
और  बर्बाद  ज़िन्दगी  कर  ली

सरबुलंद आज हो गयी औलाद
हमने  दस्तार  रेशमी  कर  ली

बीच बच्चों के जब भी हम बैठे
अपनी आवाज़ तोतली कर ली

तंगदिल जब से हो गए अहबाब
सोच हमने ही कुछ बड़ी कर ली

आपको  एतराज़   था  जिसपर
हमने फ़ितरत वो दाइमी कर ली

सब्र  को  उसके  आज़माना  था
हमने थोड़ी सी दिल्लगी कर ली

जिस्म की ज़िद से हारकर हमने
रूह  से  भी  कहा-सुनी  कर ली

अहदे हाज़िर के साथ चलने को
तेज़  रफ़्तार  हमने  भी  कर ली

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