करोगे बयां आँसुओं की जुबानी सुनेगा न कोई तुम्हारी कहानी इसी में मिली अश्क़ को शादमानी उसी सा है खारा समुंदर का पानी मिली है उन्हें उम्र पर कामरानी जो शायर पे रहती है हरदम जवानी मुक़द्दर जो ख़ुद का नहीं जानते हैं लकीरों की करते हैं वो तर्जुमानी फलक पर लिखूँगा रक़म तब ही होगी मेरी ज़िंदगी की मुकम्मल कहानी ज़मीं को भले सुर्ख़ कर दे जमाना रहा है, रहेगा फलक आसमानी कई मुख़्तलिफ़ रंग हैं ज़िन्दगी के जो होते रहे हैं अयाँ नागहानी
करोगे बयां आँसुओं की जुबानी
सुनेगा न कोई तुम्हारी कहानी
इसी में मिली अश्क़ को शादमानी
उसी सा है खारा समुंदर का पानी
मिली है उन्हें उम्र पर कामरानी
जो शायर पे रहती है हरदम जवानी
मुक़द्दर जो ख़ुद का नहीं जानते हैं
लकीरों की करते हैं वो तर्जुमानी
फलक पर लिखूँगा रक़म तब ही होगी
मेरी ज़िंदगी की मुकम्मल कहानी
ज़मीं को भले सुर्ख़ कर दे जमाना
रहा है, रहेगा फलक आसमानी
कई मुख़्तलिफ़ रंग हैं ज़िन्दगी के
जो होते रहे हैं अयाँ नागहानी
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