मिल ही जाता है हर इक को उसका सानी एक दिन

मिल ही जाता है हर इक को उसका सानी एक दिन
ख़त्म होनी है तेरी भी बदगुमानी एक दिन

चूकना मत जब उरूजे-बख़्त से मौक़ा मिले
खुद फ़ना होती है माज़ी की निशानी एक दिन

जो तसव्वुर रुख़ पे तेरे मुनअकिस भी हैं नहीं
ख़ुद ब ख़ुद होंगे बयाँ तेरी ज़ुबानी एक दिन

बदमुआमलगी अगर है राब्तों में उस्तुवार
टूट ही जायेंगे रिश्ते नागहानी एक दिन

ज़िन्दगी को क्या मिला रख़कर तवक्कुल आजतक
ज़ोर से अपने मिलेगी शादमानी एक दिन

पेशरौ बन कर सितमपरवर्दा की देखो कभी
वो ख़ुदा तुम पर करेगा मेह्रबानी एक दिन

हाले गुल पर आज खुल कर मुस्करा ले ऐ कली
हुस्न पर तेरे भी आयेगी जवानी एक दिन

ज़ुल्फ़ सावन की घटा सी, संगमरमर सा बदन
शै कोई भी हो, लगेगी तुझको फ़ानी एक दिन
उरूजे बख़्त  - भाग्य की प्रबलता
बदमुआमलगी  -  मेलजोल में व्यावहारिक खराबी
उस्तुवार   - स्थाई
नागहानी   -  अचानक
तवक्कुल  -  सब कुछ ईश्वर की मर्ज़ी पर छोड़ना
पेशरौ    -  पथ-प्रदर्शक
सितमपरवर्दा   -  आजीवन सितम सहने वाला




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