ख़ुद सरे बाज़ार आया है, लगाओ बोलियाँ

ख़ुद  सरे  बाज़ार  आया  है, लगाओ बोलियाँ
आदमी  का  मोल  ही क्या है, लगाओ बोलियाँ

मुफ़लिसों  की  आबरू की भी कोई कीमत मिले
पेट  तो  उनको  भी  भरना है, लगाओ  बोलियाँ

चढ़  गयी  है  रौशनी  सूरज की अब नीलाम पर
जुगनुओं  मौका   सुनहरा  है,  लगाओ  बोलियाँ

शबनमी   मासूम   चेहरा   नूर   है  शोखी  भी  है
हर  गली  में  चाँद  बिकता  है,  लगाओ बोलियाँ

बेटियाँ    मेरी   तुम्हारी   भी    यक़ीनन   ख़ूब   हैं
हुस्न  उनपर  भी  बला  का  है, लगाओ  बोलियाँ

दस्तरस   में   आ   रहा   है   आसमां   इंसान   के
हर  सितारे  को  ही  बिकना है, लगाओ  बोलियाँ

दो  मुझे  दो  गज़  ज़मीं  और  एक मुट्ठी आसमां
जो  बचे  बाक़ी  वो  खुल्ला  है,  लगाओ  बोलियाँ

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