जुड़ेंगे दुबारा ये इमकान है
जुड़ेंगे दुबारा ये इमकान है
अभी चाक रिश्तों में कुछ जान है
नहीं है कोई कारवाँ मेरे साथ
ये तनहा सफ़र का ही सामान है
तुम आँसू की उस बूँद को पोंछ दो
जो पलकों पे आकर पशेमान है
जुबां इक मगर कान दो हैं दिये
ख़ुदा का निहाँ इसमें फ़रमान है
भरोसा नहीं था जिसे ख़ुद पे ही
वो मंज़िल को पाकर भी हैरान है
चली है तेरे गिर्द बादे सबा
उठा जो मेरे मन में तूफ़ान है
हमें ज़िन्दगी ने ये समझा दिया
कि दिल से भी ऊपर गिरेबान है
करूँ क्यूँ मैं फ़रियाद औरों से, जब
ख़ुदा से मेरी जान पहचान है
लड़े बिन नहीं मानते अपनी हार
यही तो चराग़ों की पहचान है
किसी पर उठाता है जब हाथ तू
तो मत भूल साथ उसके भगवान है
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