मेरी ख़्वाहिश है किसी सूरत दिखा
मेरी ख़्वाहिश है किसी सूरत दिखा
तू ख़ुदा है, तो मुझे सूरत दिखा
शादमानी की मुझे भी वजह दे
तू मुझे ग़मख़्वार की सूरत दिखा
तू अगर ख़ुश हो सके तो ख़ुदकुशी
कर लूँ जो अपनी हसीं सूरत दिखा
रूह का रिश्ता है टूटेगा न अब
मत बदल कर रोज तू सूरत दिखा
तेरी सीरत ख़ुद ब ख़ुद होगी अयाँ
बस मुझे इक बार तू सूरत दिखा
कुछ हसीं दिन भी दिखा ऐ ज़िन्दगी
जैसे मुमकिन हो उसी सूरत दिखा
मत लगा चेहरे पे चेहरा बेसबब
अस्ल में क्या है तेरी सूरत, दिखा
देखना है मुझको मुस्तक़बिल मेरा
है जो बदसूरत तो बदसूरत दिखा
आँसुओं में गर्त हैं इंसान सब
बच निकलने की कोई सूरत दिखा
मौत भी चाहेगी जीना एक दिन
ज़िन्दगी की रोज उसे सूरत दिखा
आइने सच बोलते हैं तो उन्हें
आइने में उनकी ही सूरत दिखा
मिल गए हैं दो किनारे आँख के
अब रवानी की न तू सूरत दिखा
मैं गिरूँगा तो उठूँगा ख़ुद ब ख़ुद
तू तो बस मंज़िल किसी सूरत दिखा
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