ओस से गीली सहर में गुल खिला देखे कोई
ओस से गीली सहर में गुल खिला देखे कोई
झील में ज्यूँ गुलबदन को भीगता देखे कोई
फूल से चेहरों में क्यूँ क़ातिल अदा देखे कोई
क्यूँ हसीं चेहरों में चेहरा मौत का देखे कोई
नफ़रतें झूठी हैं दुनिया को दिखाने के लिए
उनका वो तिरछी नज़र से देखना देखे कोई
मैं मेरे ही 'मैं' के अंदर और अंदर हूँ निहाँ
मेरे अंदर बेकरां जो है ख़ला, देखे कोई
दुश्मनी जलते चरागों से हवा की है अयाँ
जिससे रौशन हैं दिये वो भी हवा देखे कोई
देखते हैं हम हर इक चेहरे में चेहरा आपका
ख़ुद को भूलेगा जो चेहरा आपका देखे कोई
आइने के सच पे दुनिया को भरोसा है बहुत
मेरे आईने में अपना आइना देखे कोई
08th Sept 2017
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