हम ज़मीं पैरों के नीचे की बचाते रह गये
हम ज़मीं पैरों के नीचे की बचाते रह गये
और जायज़ ख़्वाहिशों को भी दबाते रह गये
तू हमारी बेबसी को भी समझता है गुनाह
जब कि हम तेरे गुनाहों को छुपाते रह गये
जुगनुओं ने हो के यकजा दी चुनौती शम्स को
हम चिराग़ों की तरह बस टिमटिमाते रह गये
ज़िंदगी! तूने कही थी जो हमारे वास्ते
उस ग़ज़ल को उम्र भर हम गुनगुनाते रह गये
बागबां की शह पे गुलचीं ले गया शादाब गुल
और हम हर फूल पर नज़रें फिराते रह गये
ग़म हमें भी हद से ज़ाइद था तुम्हारी मौत का
हम रक़ीबों को मगर ढाढ़स बँधाते रह गये
ढूँढ कर नाकामियाँ हम तक पहुँचती ही रहीं
नक़्श हम अपने कफे पा के मिटाते रह गये
Comments
Post a Comment