जुगनुओं से ही शबे ग़म को सजा कर देखते

जुगनुओं से ही शबे ग़म को सजा कर देखते
जोड़ कर उनको, नया सूरज बनाकर देखते

मैं भी रह पाता नहीं तुमको अकेला छोड़कर
तुम अना को बीच से अपने हटा कर देखते

तुम समंदर हो तो दरिया की रवानी देखकर
खुद को थोड़ी देर तो समझा बुझाकर देखते

मुश्किलें आसां  हुई  होतीं  तुम्हारी  राह की
दोस्ती  छालों  की  कांटो से  कराकर देखते

"इस जहां में कौन मरता है किसी के वास्ते"
झूठ ये होता जो मुझको आज़मा कर देखते

झाँकना मुमकिन न था मेरे तसव्वुर में तो फिर
मेरी आँखों में तुम अपना अक़्स आकर देखते

बारहा तर्के तअल्लुक़ की न होती ज़िद तुम्हे
एक  लम्हे  को जो  मुझसे दूर  जाकर देखते

आपको शक था की मेरे दिल में कोई और था
आपको हक़ था कि मेरे दिल में आकर देखते

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