गुलों को खूं बहाना आ गया है
गुलों को खूं बहाना आ गया है
खुदा! कैसा ज़माना आ गया है
उन्हें गुस्सा दिखाना आ गया है
हमें भी मुस्कराना आ गया है
करेंगे प्यार अब हम भी किसीसे
हमें भी दिल दुखाना आ गया है
हँसी खुलकर दिखेगी अब हसीं की
हमें आँसू छुपाना आ गया है
किसी के ज़ख्म पर मरहम लगा कर
खुद अपने भूल जाना आ गया है
मेरे साये को ढलते वक़्त के साथ
खुद अपना क़द बढ़ाना आ गया है
रगों में खून जो बहता है, सब को
उसे पानी बनाना आ गया है
बहुत खुश हैं मेरे पैरों के छाले
तुम्हे कांटे बिछाना आ गया है
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